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महाकाल में कैमरे से बचकर लेनदेन का खेल
उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर के कुछ कर्मचारियों ने यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भ्रमित कर भ्रष्टाचार का कारोबार चला रखा है। देशभर से महाकाल मंदिर में हजारों श्रद्धालु रोज आते हैं। शीघ्र दर्शन, गर्भगृह से दर्शन, पूजन आदि के लिये श्रद्धालुओं से रुपये लिये जाते हैं, लेनदेन भी मंदिर परिसर में होता है लेकिन कर्मचारियों को मालूम है कि परिसर का कौन सा कौना ऐसा है जहां कैमरे की नजर नहीं जाती। ऐसे ही कर्मचारी को बुधवार सुबह लेनदेन करते हुए अक्षरविश्व के कैमरे ने कैद किया।
कानपुर का परिवार महाकाल मंदिर दर्शन करने पहुंचा था जिसमें दो महिलाएं, तीन पुरुष व एक बच्चा शामिल था। परिवार को गर्भगृह में जाकर भगवान का पूजन करना था। इस समय गर्भगृह से दर्शन नहीं हो रहे थे। कतार में लगे श्रद्धालुओं को नंदीगृह के पीछे रैलिंग से दर्शन कराये जा रहे थे इसलिये उन्होंने थर्ड आई कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड से जानकारी मांगी। गार्ड ने 1500 रुपये शुल्क बताकर सेटिंग से कम रुपयों में दर्शन कराने की बात उक्त लोगों से कही।
श्रद्धालु इसके लिये तैयार हो गये लेकिन जब श्रद्धालु दर्शन के लिये मंदिर में जाने लगे तो उन्होंने एलसीडी स्क्रीन पर देखा कि आम लोग गर्भगृह से दर्शन कर रहे हैं तो वह भी आम लोगों की कतार में लगकर दर्शन के लिये गर्भगृह में पहुंच गये। यहां से बाहर आने के बाद जब श्रद्धालु परिसर की सीढिय़ों पर बैठे थे तभी सिक्योरिटी गार्ड उनके पास पहुंचा और प्रति व्यक्ति के मान से रुपयों की मांग की। श्रद्धालुओं ने उससे कहा कि दर्शन तो सामान्य कतार से हुए फिर भी कुछ रुपये ले लो। यह सारा नजारा अक्षरविश्व की टीम ने देखा और उसे कैमरे में कैद कर लिया।
अधिकारियों से करेंगे शिकायत
पूरा मामला देखने के बाद जब कानपुर के श्रद्धालुओं से चर्चा की तो उन्होंने कहा बिना शुल्क के जब गर्भगृह से दर्शन हो रहे थे तो रुपये किस बात के देना थे फिर भी गार्ड को खुशी से 200 रु. दे रहे थे लेकिन वह अधिक रुपयों की मांग कर रहा था। अधिकारियों से इसकी शिकायत करेंगे। उन्होंने अपना नाम और फोटो प्रकाशित करवाने से इंकार कर दिया।
बोर्ड पर नजर नहीं
महाकाल मंदिर में प्रवेश, दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वास्थ्य, भोजन, होटल, पुलिस से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी के बोर्ड जगह-जगह मंदिर प्रशासन ने लगाये हैं लेकिन श्रद्धालु इन बोर्ड को ठीक से पढ़ते नहीं और यहां व्यवस्था और सुरक्षा में लगे कर्मचारियों से पूछताछ करते हैं। इन्हें में से कुछ कर्मचारी मौके का फायदा उठाकर श्रद्धालुओं से रुपये लेने से बाज नहीं आते जिससे मंदिर की छवि धूमिल होती है।